पिछले विधान सभा के चुनाव के दौरान बिहार की जनता से मैंने एक वादा किया था कि मैं राज्य में कानून के शासन को पुन: बहाल करूँगा ।
ये कतई आसान न था । मुझे इस प्रयास में उस मिथक को तोड़ना था कि बिहार में अपराध नियंत्रण किसी के वश में नहीं है । मैं इसके लिये कृतसंकल्प था किन्तु मुझे इस बात का ख्याल रखना था कि हमें इस उद्देश्य की प्राप्ति कानून के दायरे में ही करनी थी । विगत में देश के विभिन्न भागों से आयी खबरों के कारण मुझे इस बात का इल्म था कि कानून-व्यवस्था के नियंत्रण के नाम पर अक्सर मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है । इसी लिये मुझे यह सुनिश्चित करना था कि हमारी लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में इस प्रकार की चूक न हो । अपराध नियंत्रण के संदर्भ में सर्वप्रथम मेरा ध्यान आर्म्स एक्ट के अंतर्गत दायर किये उन हजारों मामलों की तरफ गया जो वर्षों से लंबित थे । आर्म्स एक्ट के अंतर्गत तीन साल तक की सजा का प्रावधान है और इन मामलों में मुख्यत: राज्य के पुलिसकर्मी ही गवाह होते हैं । मैंने महसूस किया कि इन केसों का शीघ्र निष्पादन संभव है ------ अगर उनसे जुड़े गवाहों की उपस्थिति न्यायालयों में सुनिश्चित की जाए ।
हमारी सरकार ने तत्पश्चात बिहार पुलिस मुख्यालय में एक विशेष कोषांग की स्थापना ऐसे ही सारे मामलों के निष्पादन एवं इनसे जुड़े गवाहों को न्यायालयों में उपस्थित कराने के लिए की------ जिससे कानून तोड़ने वालों को समुचित सजा मिल सके । मैंने अधिकारियों की निर्देश दिया कि गवाहों को उपस्थित कराने के लिए वे यथासंभव न्यायालय से एक से अधिक तिथि की मांग न करें ।
मेरा ऐसा मानना है कि न्याय करना न्यायालय का कार्य है किन्तु सरकार का यह दायित्व है कि वह त्वरित न्याय के हेतु समुचित व्यवस्था करें । इस दिशा में हमारी सरकार ने न्यायालयों ऐसे कई गवाहों की उपस्थिति भी सुनिश्चित कराई जो झारखंड राज्य की स्थापना के बाद वहॉं चले गये थे । हमारे इन प्रयासों का जल्द असर हुआ और आर्म्स एक्ट के हजारों मामलों का निष्पादन त्वरित गति से हुआ । इस संदर्भ में मैं अपना-पराया भूल गया । इस बात से शीघ्र ही सभी अवगत हो गये कि कानून अपना काम करने लगी है । अपराधियों के बीच जुर्म करने के बाद कानून की पहूँच से दूर बने रहने का गुमान खत्म होता दिखने लगाA
इन प्रयासों से आम लोगों में एक संदेश गया और उनमें सरकार के प्रति विश्वास जागृत हुई । उन्हें यह अहसास हुआ कि अब कानून तोड़ कर सजा से बचना किसी के लिये संभव न हो । तत्पश्चात राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत ऐसे लोग, जो किसी न किसी पुराने मामलों में सजा दिलाने के लिये न्यायालयों में उपस्थित होना चाहते थे] अब खासे भयमुक्त हो कर आगे आने लगे ।
इससे कानून तोड़ने वालों को भी समझ में आ गया कि हमारी सरकार अपराध नियंत्रण हेतु कितनी सजग है । जिन्हें अपनी काले शीशे चढ़े वाहनों की खिड़कियों से बंदूके दिखाने का शौक था या फिर उन्हें जिन्हें शादी-विवाह के अवसर पर शामियाने में अपनी गैर-लाईसेंसी हथियार से गोली दागकर शक्ति प्रदर्शन की अभिरूचि थी यह समझने में कतई वक्त नहीं लगा ।
सन 2006 में मैंने लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु एक मींटिग आहूत की जिसमें पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के अलावे सभी जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक और लोक अभियोजक शामिल हुये । मेरी जानकारी में भारत में ये अपने प्रकार की पहली पहल थी । हमने एक 'एक्शन प्लान' के तहत हजारों लंबित मामलों की सुनवाई हेतु 'स्पीडी ट्रायल' की व्यवस्था की, जिसके कारण हजारों मुजरिमों को सजा मिली । कई मामलों की सुनवाई जेल प्रांगण में भी शुरू की गई । इन मामलों में हुये त्वरित कार्यवाही से अपराधियों में कानून के प्रति भय हुआ । मैंने तो बस यह संदेश दिया था कि हमारी सरकार अपराध नियंत्रण की दिशा में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगी । इस संदर्भ में माननीय न्यायालयों एवं न्यायिक प्रक्रिया से संबद्ध प्रबुद्ध मानस का सहयोग सराहनीय रहा ।
आपको भी खुशी होगी कि अब तक के हमारे शासन काल में एक भी संप्रदायिक दंगे या जातीय संघर्ष की घटना नही हुई है । हमनें प्रत्येक जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया हुआ है कि समाज में शान्ति एवं सद्-भाव बरकरार करना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है । जब हमनें बिहार में शासन की कमान संभाली तो हमनें महसूस किया कि हमारे थानों में संसाधन का नितांत अभाव है । अगर कोई नागरिक कोई शिकायत दर्ज कराने जाता था तो उससे कहा जाता था कि वह स्वयं कागज की व्यवस्था करे । हमारी सरकार ने थानों के रख-रखाब के लिये एक विशेष वार्षिक कोष का गठन किया ।
इन तमाम प्रयासों से हमें एक भय-मुक्त समाज बनाने में मदद मिली । वर्षों बाद लोग देर रात तक अपने परिवार के सदस्यों के साथ सड़क पर पु:न दिखने लगे । एक वक्त था जब समाज में भय इस कदर व्याप्त था कि पटना के रेस्त्ररां में बमुश्किल एक या दो ग्राहक रात्रि में देखे जाते थे । अब आलम यह है कि लोंगों को होटलों में प्रवेश के लिये कतार में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है । यहॉं तक कि लोग परिवार सहित नाईट शो में भी सिनेमा हॉल में फिर से दिखने लगे हैं । मुझे यह कहने में लेशमात्र झिझक नहीं है कि यह परिवर्त्तन मूलत: अपराध पर नियंत्रण होने के कारण संभव हो पाया । इसका प्रभाव अन्य क्षेत्रों पर भी हुआ । मुझे आजकल अक्सर कहा जाता है कि पटना में एक फ्लैट की कीमत देश के अन्य विकसित शहरों की तुलना में अधिक है । ऐसा तब हुआ जब पिछले वर्ष की आर्थिक मंदी ने बाजार को हर जगह प्रभावित किया । हमारे शासन काल के पहले पंद्रह वर्षो में बिहार में व्यापार के क्षेत्र में विकास नहीं हुआ था । लोग अपनी संपत्ति को कम दामों में बेचकर राज्य छोड़कर अन्यत्र बसने लगे । बिहार में उस समय में 'डिसट्रेल सेल' के अनेक उदाहरण अभी भी मिल सकते है । आज के बदले माहौल में व्यापार और व्यवसाय जिस गति से बढ़ते दिख रहे हैं उससे मुझे विश्वास है कि निकट भविष्य में हमारी व्यवस्था खुद अपनी सचेतक व नियंत्रक की भूमिका जिम्मेदारी पूर्वक निवार्ह कर सकेगी ।
विगत दिनों में गया में एक जापानी पर्यटक से दुष्कर्म का मामला सामने आया। जिस दिन मुझे इसकी जानकारी मिली मुझे उस रात नींद नहीं आयी । मैंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो और इस मामले को निपटारा त्वरित न्यायालय में हो । इस मामले में आरोपियों का गिरफ्तार किया जा चुका है और न्यायालय में पुलिस ने आरोप-पत्र दाखिल भी कर दिया है । इस घटना में संलग्न सभी अपराधियों को शीघ्र सजा मिलेगी ।
यह सच है कि समाज से अपराध का खात्मा पूर्णत: नहीं किया जा सकता है किन्तु समुचित प्रशासिनक व्यवस्था एवं समयबद्ध न्याय के साथ उसका नियंत्रण संभव है । खास बात यह है कि जनमानस पटल पर सुरक्षा को लेकर लकीरें न दिखें । अवाम में असुरक्षा की भावना अपराधियों को ही बल देगी ।
हमारी सरकार ने अपराध के लिये समुचित सजा सुनिश्चित कर जनता का विश्वास जीता है । बिहार में यह अब संभव नही है कि कोई व्यक्ति जुर्म करके सजा से बचा रह सके ।---ऐसी हमारी दृढ़संकल्पिता है ।
उन्हें अब इस बात का पता है कि कोई है जो उन पर नजर बनाये हुये है ।
नीतीश
11 comments:
One thing which came in limelight was people got sentenced for Jahanabad heines crime. Where 60 Dalits were lilled by Ranveer sena. They got waht they did. It really shows the great judgement of Bihar Gvt. I appreceate for this Mr. Nitish Kumar. Just keep it up,
May 4, 2010 at 11:05 AMSo that we can keep proud being a bihari.
Regards,
Dharmendra Yadav(MBA) Ahmedabad
dear Mr. nitish kumar,
May 12, 2010 at 2:26 AMaapne apna kaam bkhubi kiya hai.Bihar ki janta iske liye sda aapka abhari rhe ge, our rha ki crime pe kabu pana to aap apni police ko thora advance banana ho ga. yadi aap bihar police ke bare me mari ray(comments) puchiyega to mare jabab wahi hai jo 5 saal phale tha. mai manta hoo kai crime ko rokne ki liye achi koshi ki hai(bihar police), lekin mai isse santust nahi hoon.
aap apni police ko tohada imandar banaeye.unme josh lana hoga,mare ray me to kuch achi film (police story film) dikane hoga.
sabse badi baat hai ki "hum sudhrege to jag sudhrega".
sir maine lagbhag pura india ghuma hoon, our pure india me kerala ki police achi hai, Kerala Police logo ki help kari hai, chahe kisa bhai help ho.
Badhayi.
May 13, 2010 at 4:31 AMBlog Jagat Men swagat hai.
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मची आय रे दैया।
आपके घर में आर्यभट्ट छुपा है?
मुख्यमंत्री जी,
May 15, 2010 at 2:22 AMहर तरफ आपकी जय जयकार हो रही है. इतना तो हर कोई मानता है कि आपने राज्य में हालात बेहतर किए हैं लेकिन इतना काफी नहीं है.
आज भी घुसखोरी और सरकारी बाबुओं के नखरे जनता हर रोज उठाती है.आपके किसी भी योजना का फायदा उनलोगों को नहीं मिल पाता जो सही में इसके हक़दार होते हैं.
There is a perception in peoples mind including me about the varrying work culure of different ministries and ministers.no doubt u along with modi ji and some other dept are working very efficiently.but there are still some ministiries and minister like in agri.energy,transport and sugarcane just to list which are not working upto mark.plz request and suggest them to work witha aproach of bihar building by competing +vely with each other.so taht we can see a overall inclusive development.
May 18, 2010 at 9:52 PMummid yahi hai ki aage bhi bihar ke utthan me sarthak prayas jari rahega..
May 21, 2010 at 9:27 AMNitis ji bahut bahut badhai abhi tak ke kaam ke liye..
Dear C.M
May 22, 2010 at 12:42 AMthanks for making bihar a safer place
and making bihar a great place to live....
kota,rajsthan
June 9, 2010 at 7:32 AMindia
sir,
i am from hajipur and preaparing for aipmt(all india pre medical test) sir i want to tell the candle you lighted of coaching is really working
now engeering students outsourcing for preparation has been stoped to a large extent
so. please make more fare arrangements in patna so no student come out from bihar to expent crores of rupees
dear sir
August 8, 2010 at 10:29 AMapne bihar me kanun rajya ko vapas sthapit karne ka prayas kiya hai jo ki atyant sarahniya hai. prantu itne dino ki bigri vyavastha itni jaldi sambhal nahi sakti... iske liye apko fir se bihar me apna rajya lana hoga aur aaj jo bihar k log anya rajyo me pirit ho rahe hain unhe bihar me hi unke liye rojgar k avsar ko pradan karna hoga
dhanyawad
wish u all the best for coming election
you have done a really good job.
October 9, 2010 at 10:46 PMthanx
vivek
AAPKE SADKARM NISHCHIT TOUR PAR APAKO DOOBARA SATTA DILAYEGA, SADAK NIRMAN AUR LAW & ORDER MEN SUDHAR NIHSANDEH AAPKI ADBHUT UPLABDHI HAI, LEKIN AGLE KARYAKAL MEN AAPSE AUR BHI KAI UMMIDEN HAIN. BEROJGARI, PALAYAN AUR BHRASHTACHR ROKNA JAROORI HAI, ISE ROKNE KE LIYE 'SPEEDY TAIL' SAREEKHE KARGAR KADAM UTHANE KI ABSHYAKTA HAI. AAPSE YES BHI AASHA HAI KI AAP PAHLE SE JYADA LOKTANTRIK TAREEEKE SE SHASAN KARENGE. MERA VOTE AUR SAHYOG HAMESHA AAPKE SATH HAI!
November 4, 2010 at 12:52 AM-ROHIT KUMAR,
BMC(PATNA COLLEGE)
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